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उन्नाव कांड: सुप्रीम कोर्ट ने पीड़िता के चाचा को रायबरेली से तिहाड़ ट्रांसफर करने का आदेश दिया

चैनल हिंदुस्तान डेस्क: सुप्रीम कोर्ट ने उन्नाव रेप मामले में सभी केस को दिल्ली ट्रांसफर करने के बाद पीड़िता के चाचा को अविलंब रायबरेली जेल से तिहाड़ जेल ट्रांसफर करने का आदेश दिया है। हालांकि कोर्ट ने पीड़िता को किंग जार्ज मेडिकल अस्पताल से दिल्ली एम्स ट्रांसफर करने से मना कर दिया है। कोर्ट ने ऐसा पीड़िता के परिजनों के आग्रह पर किया है, हालांकि कोर्ट ने कहा कि परिजन चाहें तो उसे इलाज के लिए बाहरलेजा सकते हैं। साथ ही कोर्ट ने सभी मीडिया हाउस को निर्देश दिया है कि वे प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष तौर पर अथवा किसी भी तरीके से उन्नाव बलात्कार पीड़िता की पहचान उजागर नहीं करे। पीड़िता की सुरक्षा की जिम्मेदारी अब सीआरपीएफ को दे देी गयी है।

सभी केस को दिल्ली ट्रांसफर किया गया

उन्नाव कांड में बड़ा फैसला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मामले से जुड़े सभी 5 केसों को दिल्ली ट्रांसफर करने को कहा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बाकी के सभी 4 केसों पर सुनवाई 45 दिनों के भीतर पूरी की जाये। कोर्ट ने कहा कि पीड़िता के साथ हुए हादसे की जांच 7 दिनों के भीतर पूरी की जाए। कोर्ट ने उप्र सरकार को निर्देश दिया है कि बलात्कार पीड़ित और उसके वकील को 20-20 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए। सीआरपीएफ को तत्काल प्रभाव से पीड़ित परिवार के सदस्यों को सुरक्षा मुहैया कराने का आदेश दिया गया है।

सुरक्षा में तैनात तीन पुलिस कांस्टेबल निलंबित

देशभर में नाराजगी और तीखी प्रतिक्रिया के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने वृहस्पतिवार को उन्नाव बलात्कार पीड़िता की सुरक्षा के लिए लगाये गये तीन पुलिस कांस्टेबलों को निलंबित कर दिया। इस बीच, राज्य सरकार ने उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर बलात्कार पीड़िता के परिजनों को अंतरिम मुआवजे के तौर पर 25 लाख रुपये दिए। रविवार को सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाली पीड़िता की मौसी का बाराबंकी स्थित उनके गांव में अंतिम संस्कार कर दिया गया। सपा ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस्तीफे की मांग की है। बलात्कार पीड़िता की सुरक्षा के लिए लगाये गये तीन पुलिसकर्मियों को डयूटी में लापरवाही बरतने के लिए निलंबित कर दिया गया। उन्नाव के पुलिस अधीक्षक एम पी वर्मा ने बताया कि निलंबित पुलिसकर्मियों के नाम सुदेश कुमार, सुनीता देवी और रूबी पटेल हैं। पीड़िता के एक अन्य वकील अजेन्द्र अवस्थी को भी जिला प्रशासन ने पर्याप्त सुरक्षा मुहैया करायी है।

मौसी का हुआ अंतिम संस्कार

अवस्थी ने रविवार की दुर्घटना के परिप्रेक्ष्य में सुरक्षा का आग्रह किया था। दुर्घटना में पीड़िता का एक वकील गंभीर रूप से घायल हो गया है। पीड़िता की मौसी का अंतिम संस्कार बाराबंकी स्थित उनके गांव में कर दिया गया। उनके शव को लखनऊ से कडी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सुबेहा थानाक्षेत्र स्थित गांव में लाया गया। अंतिम संस्कार उनके बेटे ने दो बेटियों की मौजूदगी में किया। मौसी के पति का पहले ही देहान्त हो चुका था.मौसी का शव पहुंचते ही परिवार वाले रोने बिलखने लगे। वहां पर आईजी और एसपी के नेतृत्व में भारी संख्या में पुलिस बल सुरक्षा में तैनात था। गांव के बाहर ही मौसी का अंतिम संस्कार कर दिया गया। मृतका की बेटी ने पत्रकारों से बातचीत में आरोप लगाया कि उसकी मां की मौत हादसे में नहीं हुई बल्कि विधायक कुलदीप सिंह सेंगर ने यह दुर्घटना करवायी है। उसकी मां उन्नाव बलात्कार पीड़िता के साथ पिछले नौ महीने से वहीं रहकर मामले की पैरवी करती थी। उसने कहा कि सारा किया-कराया विधायक कुलदीप सिंह सेंगर का ही है और सेंगर की सोची समझी साजिश है। मां की मौत की भरपाई तो नहीं हो सकती है लेकिन सरकार से मांग है कि उसके भाई को नौकरी दी जाए और आर्थिक मदद की जाये।

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