नेहरू के ज़माने से मोदी के ज़माने तक चुनाव जीते करुणानिधि

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डेस्क: तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और DMK प्रमुख एम करुणानिधि का 94 साल की उम्र में मंगलवार (07 अगस्त) की शाम को निधन हो गया। करुणानिधि के निधन की खबर से पूरे देशभर में शोक की लहर है। डीएमके प्रमुख का पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए चेन्‍नई के राजाजी हॉल में रखा गया है। साल 1924 में थिरुक्कुवालाई गांव में एक गरीब परिवार में उनका जन्म हुआ था।
एम करुणानिधि जातिवाद और सामाजिक भेदभाव के खिलाफ संघर्ष करने वाले सामाजिक सुधारवादी नेता पेरियार और तमिलनाडु में पहले गैरकांग्रेसी मुख्यमंत्री सीएन अन्‍नादुरई के समर्थक थे। साल 1957 में उन्होंने पहला विधानसभा चुनाव जीता और मात्र 32 साल की उम्र में विधायक बने। 1957 में वो डीएमके के उन 15 विधायकों में से एक थे, जिन्होंने विधानसभा में अपना कब्जा जमाया था। उस जमाने में देश के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू थे।
उसके बाद अगला विधानसभा चुनाव 1962 में हुआ। ये चुनाव डीएमके लिए बेहद ही खराब रहा, क्योंकि पांच साल पहले जनता ने जिन 15 विधायकों को विधानसभा भेजा था, उनमें से 14 विधायकों को जनता ने बाहर का रास्ता दिखा दिया। डीएमके की तरफ से ही करुणानिधि एकमात्र ऐसे नेता थे, जो विधानसभा पहुंचने में कामयाब हो सके। अपनी पूरी राजनीतिक यात्रा में करुणानिधि अपराजेय रहे और एक बार भी विधानसभा चुनाव नहीं हारे।
1969 में जब देश की बागडोर इंदिरा गांधी ने संभाली तो उसी दौर में एम करुणानिधि तमिलनाडु में पहली बार मुख्‍यमंत्री बने। इसके बाद उन्‍होंने कुल 13 विधानसभा चुनावों में लगातार जीत दर्ज की।
लगातार विधानसभा पहुंचने के क्रम में 2016 के विधानसभा चुनाव में भी करुणानिधि ने जीत दर्ज की। इस तरह देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित नेहरू के जमाने से लेकर मौजूदा पीएम नरेंद्र मोदी के दौर तक वह सार्वजनिक जीवन में उपस्थित रहे।

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