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ये कहाँ आ गए हम? मरे हुए जानवरों के सड़े मांस खा रहे हम

रमेश प्रसाद :
कोलकाता : मनुष्य पैसे के लिए कितना नीचे गिर सकता है इसका उदाहरण
आज देखने को मिल रहा है .कोलकाता के बड़े बड़े नामी गिरामी रेस्टोरेंट और
होटलों में मरे हुए सड़े गले जानवरों के मांस की आपूर्ति की जाती रही ,उसे मसालेदार
जायकों के साथ ग्राहकों के समक्ष परोस कर लाखों करोड़ रूपये मुनाफे कमाए गए .
यह सिलसिला एक लम्बे अरसे से चला आ रहा था और कि खाने वाले भी नहीं पहचान
पा रहे थे कि वे क्या खा रहे हैं मटन ,चिकन या कि बीफ .हद हो गई कोलकाता महानगर
के भागाड में फेंके गए मृत जानवर जिसमे कुत्ते ,बकरे ,गाय ,बैल,सांड ,भैंस सभी शामिल
हैं उनके मांस को काटकर विभिन्न होटलों में आपूर्ति की गई फिर उस मांस का
मसालेदार जायका ग्राहकों के समक्ष प्रस्तुत किया गया . ग्राहकों ने भी चटखारे के साथ
उंगलियाँ चाट चाट कर खाई ,अद्भुत स्वाद बताया . इस बात का पता तब चला जब किसी
ने भगाड़ में आनेवाले मृत जानवरों के मांस की बिक्री में अपना हिस्सा नहीं मिलने पर मुखबिरी
कर दी और पुलिस को इस बात का पता चल गया . पुलिस
प्रशासन सकते में आ गया आनन फानन में कार्रवाई की गई लेकिन यह क्या ? पुलिस के हाथ पांव
फुल गए कैसे गिरफ्तार करे ,किसे गिरफ्तार करे सभी तो खासमखास चेहरे हैं जो इस मालदार
कमाई के हकदार हैं .पुलिस के कदम थम गए लेकिन सोसल मीडिया जाग चूका था उसने अपना
काम जारी रखा और हावड़ा के अशोका होटल में कुत्ते के मांस को परोसे जाने पर तूफान खड़ा कर दिया
पुलिस हरकत में आई और छापा पड़ा तो कुत्ते के मांस की पुष्टि की गई .
अब सवाल यह उठता है कि मानव समाज कहाँ जा रहा है ,पैसा उसके लिए अपरिहार्य हो गया है जिसके लिए
वह कुछ भी करने को तैयार है . जो मांस विक्रेता होटलों रेस्टोरेंटों में मरे हुए जानवरों के सड़े मांस की
आपूर्ति शहर के नामी गिरामी होटलों और रेस्टोरेंटों में धड़ल्ले से कर रहा है इसके पीछे कई नामी और
प्रभावी लोग काम कर रहे हैं इस बात से नाकारा नहीं जा सकता . तो क्या अब ये मांस के विक्रेता लावारिस
मानवों के लाशों को भी छोटे छोटे टुकड़ों में काटकर होटलों और रेस्टोरेंटों में आपूर्ति नहीं करेंगे
इस बात की क्या गारंटी है ?

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