हिन्दू रीतिरिवाज और हिंदी भाषा के विरोधी थे करुणानिधि

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डेस्क: डीएमके नेता और पूर्व मुख्यमंत्री एम करुणानिधि के निधन के बाद दफनाया जाएगा। ऐसा इसलिए क्‍योंकि द्रविड़ आंदोलन के बड़े नेता परियार, सीएन अन्‍नादुरई, एमजी रामंचद्रन और जयललिता जैसी शख्सियतों को दफनाया गया। इसको दरअसल द्रविड़ आंदोलन की पृष्‍ठभूमि से जोड़कर देखा जा रहा है। इन वजहों से चंदन और गुलाब जल के साथ इन नेताओं को दफनाया गया है।
ज्ञात हो कि द्रविड़ आंदोलन मुख्‍य रूप से ब्राह्मणवाद और हिंदी भाषा के विरोध के रूप में उभरा। ब्राह्मणवाद के विरोध स्‍वरूप द्रविड़ आंदोलन के नेताओं ने हिंदू धर्म की मान्‍यताओं को खारिज किया। लिहाजा इस आंदोलन के नेता नास्तिक रहे। इन्‍होंने सैद्धांतिक रूप से ईश्‍वर और हिंदू धर्म से जुड़े समान प्रतीकों को नहीं मानते थे। वे इसके बजाय प्रकृति और मानवतावाद पर जोर दिया करते। द्रविड़ आन्दोलन के मुखर रहे करुणानिधि भी हिन्दू रीतिरिवाज और हिंदी भाषा के विरोधी रहे।
हालांकि बाकी द्रविड़ नेताओं के उलट जयललिता आयंगर ब्राह्मण थी। वह माथे पर अक्‍सर आयंगर नमम (एक प्रकार का तिलक) लगाती। आयंगर ब्राह्मणों में दाह संस्‍कार की परंपरा है लेकिन इसके बावजूद उनको दफनाया गया। जयललिता के संबंध में भी यही तर्क दिया गया कि वह किसी जाति और धार्मिक पहचान से परे थी।

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