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मोदी सरकार ने भ्रष्टाचार मामले में 22 सीनियर अधिकारियों को नौकरी से निकाला

चैनल हिंदुस्तान डेस्क: केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) ने सोमवार को 22 और वरिष्ठ अधिकारियों को रिटायर कर दिया। इन अधिकारियों पर जनहित में मौलिक नियम 56 (जे) (Fundamental Rule 56 (J)) के तहत रिटायर किया गया है। इन अधिकारियों पर भ्रष्टाचार और अन्य आरोपों के कारण गाज गिरी है । ये सभी अधिकारी अधीक्षक/एओ रैंक के हैं।

गौरतलब है यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लालकिले की प्राचीर से स्वतंत्रता दिवस पर देश के संबोधन के बाद उठाया गया है। इस दौरान उन्होंने कहा था कि ‘कर प्रशासन में कुछ लोग अपने शक्तियों का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। वे इसका इस्तेमाल करदाताओं का उत्पीड़न करने के लिए कर रहे हैं। उन्होंने कहा था कि हम इस प्रकार के व्यवहार को बर्दाश्त नहीं करेंगे। इस दौरान उन्होंने कहा था कि सरकार ने हाल ही में ऐसे मामलों में शामिल कर अधिकारियों को अनिवार्य रूप से रिटायर करने का साहसिक कदम उठाया है।

CBIC के एक अधिकारी ने कहा, ‘हमने हाल ही में कर अधिकारियों की एक महत्वपूर्ण संख्या को अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त करने का साहसिक कदम उठाया है। हम इस तरह के व्यवहार को बर्दाश्त नहीं करेंगे।’ गौरतलब है कि 27 जून को, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के 12 अधिकारियों सहित उच्च रैंकिंग वाले भारतीय राजस्व सेवा अधिकारियों को अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त कर दिया गया था।

विभाग इसके अलावा राजस्व संग्रह को बढ़ाने और देश में कर-भुगतान करने वाले लोगों की संख्या बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। सरकार इस आधार को बढ़ाना चाहती है ताकि अधिक लोग अपनी आय पर वैध करों का भुगतान करें।

क्या है मूल नियम

मूल नियम (Fundamental Rule) का इस्तेमाल 50 से 55 साल के अधिकारियों के लिए किया जाता है। इसका इस्तेमाल अपने कार्यकाल का 30 साल पूरे कर चुके अधिकारियों के लिए होता है। सरकार के पास ऐसे अधिकारियों को अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्ति देने का अधिकार होता है। यह नियम काफी समय से प्रभावी है।

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