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तिरंगे रंग में जगमगाएगा लालकिला, जानें कैसे पड़ा नाम ‘लालकिला’

डेस्क: स्वतंत्रता दिवस पर सबसे बड़ा जलसा दिल्ली के लालकिला में होता है। हर साल प्रधानमंत्री लालकिले के प्राचीर से देश को संबोधित करते हैं। लालकिले की अहमियत जितनी बड़ी है, इसकी दास्तान भी उतनी ही रोचक है।
ज्ञात हो कि इसी वर्ष डालमिया ग्रुप ने लालकिला के देख रेख के लिए इसे सरकार से गोद लिया है।
इस बार स्वतंत्रता दिवस में लालाकिला को लाइट से तिरंगे के जैसा सजाया जाना था, जो कि एक दिन पहले ही ये काम पूरा कर लिया गया।

जानिए लालकिला के बारे में कुछ खास बातें

  • 1638 में मुगल बादशाह शाहजहां ने लालकिले को बनवाया था। उन्होंने आगरा की जगह दिल्ली को अपनी राजधानी बनाया था। यूनेस्को के विश्व धरोहर में लालकिला भी शामिल है
  • लालकिले का असल रंग सफेद था, क्योंकि यह चूना पत्थर से बनाया गया था। बाद में चूना पत्थर जब खराब होने लगा तो अंग्रेजों से इस पर लाल रंग चढ़वा दिया, तभी से इसे लालकिला कहा जाने लगा
  • 10 साल में लालकिले का निर्माण पूरा हो गया था। उस्ताद हामिद और उस्ताद अहमद ने 1638 में इसका काम शुरू किया था, जो कि 1648 में पूरा हुआ
  • लालकिला 8 हिस्सों में बंटा है – दीवान-ए-खास, दीवान-ए-आम, खास महल, नहर-ए-बहिश्त, जनाना, नक्करखाना, मोती मस्जिद और हयात बख्श बाग
  • मुगल शासनकाल में लालकिले को किला-ए-मुबारक कहा जाता था। दुनिया का सबसे बड़ा कोहिनूर हीरा यहीं रखा गया था। शाहजहां जिस तख्त पर बैठते थे, उसी में यह हीरा जड़ा था
  • यह किला यमुना नदी के किनारे बना है। इस किले की नक्काशी में फारसी, यूरोपीय और भारतीय कला का समावेश नजर आता है।
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