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कविताओं पर विमर्श – “क्यूंकि” एक पहल ज़रूरी है

गत रविवार “क्यूंकि” संस्था द्वारा बड़ाबाजार लाइब्रेरी में डॉ. गिरधर राय की अध्यक्षता में हिंदी साहित्य एवं कविताओं पर एक ज्ञानवर्धक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, ज्ञानवर्धक इसलिए क्यूंकि कार्यक्रम के पहले सत्र में कविता, गीत, ग़ज़ल में निपुण एवं काव्य की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने वाले कवि एवं शिक्षकों द्वारा कविता पर न सिर्फ विचार रखे गए , अनुभव बांटे गए अपितु बहुत सी जानकारी और सीख भी दी गयी,
साथ ही युवा रचनाकारों को ये अवसर प्रदान किया गया की वे अपने प्रश्न उनके सामने रख सके और समय सीमा को ध्यान में रखते हुए भी मंचासीन कविगण ने युवा साथियों का यथासंभव मार्गदर्शन किया ।

इस परिचर्चा में अपना अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुए डॉ. गिरधर राय ने कहा कि कविता में असीम शक्ति होती है। कविताएँ स्वतः अपने पाठक के साथ एक गहरा नाता जोड़ लेती हैं । अपनी बातों के समर्थन में डॉ०राय ने कवि छविनाथ मिश्र जी तथा अरुण प्रकाश अवस्थी जी की कविता को उद्धृत किया।
ग़ज़लकार रामनाथ बेख़बर ने अपनी बात रखते हुए कहा कि कोई भी रचना धैर्य की धीमी आँच पर पककर ही परिपक्व होती है और अच्छी रचनाओं में भाव,भाषा व शिल्प की त्रिवेणी प्रवाहित होती है।अतः रचनाकारों को भाव के साथ-साथ भाषा व शिल्प पर भी अपनी मजबूत पकड़ बनानी चाहिए।
युवा कवयित्री नीतू सिंह भदौरिया ने कहा कि हम जिस समाज में रहते हैं उससे हमारा गहरा सरोकार होता है।अतः उस समाज का चित्रण हमारी रचनाओं में होना ही चाहिए।उन्होंने रचनाधर्मियों से संवाद के क्रम में कहा कि ‘आप जब समाज़ के लिए लिखते हैं तो आपकी जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।
कवयित्री अनु नेवटिया ने कहा कि भाव के अभाव में कविता नहीं हो सकती।भाषा व शिल्प को तो साहित्य-साधक परिश्रम के द्वारा साध ही लेते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कविता कैसे मर सकती है जब आप जैसे नौजवान उसे घुट्टी पिला रहे हैं ।
गीतकार चंद्रिका प्रसाद पांडेय अनुरागी ने नए रचनाकारों को लेखन के लिए प्रोत्साहित करते हुए कहा कि आप लोगों को अपने बीच देखकर हम पुराने रचनाकारों को यह सुखद अनुभूति होती है कि हमारा वंश बढ़ रहा है और आप लोग लिखिए और बस लिखते रहिये। यदि आपके लेखन में दम होगा तो आपको आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता।

कवि रमाकांत सिन्हा ने कविता को ब्रह्म बताते हुए कहा कि कविता मानव हृदय को परिष्कृत कर उसे निर्मल बनाती है।
कवयित्री निशा कोठारी ने भी कविता के सम्बंध में अपने अनुभव को साझा करते हुए यह बताया कि काव्य सृजन सहज कार्य नहीं है और यह जरूरी नहीं कि हर कविता काव्य-कला की कसौटी पर खरी उतरे। फिर भी यदि काव्य सर्जक के मन में सृजन के प्रति लगन हो तो वह बेहतरीन सृजन कर सकता है।

कार्यक्रम का दूसरा सत्र काव्य पठन का था ,जिसका मुख्य उद्देश्य था नवोदित कलमकारों को मंच प्रदान कर प्रोत्साहित करना।
काव्य पाठ करने वाले कविगण में शामिल रहे रौनक बजाज , अर्शियान ,श्रद्धा टिबरेवाल, दीपक मालाकार, अंकुश, शिवांस, अनुराधा,सिद्धांत, राहुल, नवनीत, इमरोज़, दिग्विजय, अभिषेक, अंकेश व अमित।

युवाओं ने जिस लगन के साथ अपने वरिष्ठ कविगण को सुना उतने ही आत्मविश्वास के साथ अपना काव्यपाठ किया और भरपूर तालियां बटोरी।
अतः कहना गलत नहीं होगा की इस कार्यक्रम का उद्देश्य नवोदित लेखकों और पुराने स्थापित लेखकों के बीच सामंजस्य स्थापित करना था जो बखूबी किया भी किया।

कार्यक्रम का सकुशल संचालन किया युवा कवि दीपक सिंह ने एवं धन्यवाद ज्ञापन दिया इस पुरे आयोजन के सूत्रधार मनीष कुमार झा ने।

कार्यक्रम को सफल बनाने में दीपक साव, मोहित किराडू, साहिल गिरी, श्रेयांस और मनीष ने अहम भूमिका निभाई।

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