आखिरी चरण: PM नरेंद्र मोदी सहित दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर

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चैनल हिंदुस्तान डेस्क: लोकसभा चुनाव के सातवें और अंतिम चरण में उत्तर प्रदेश की 13 सीटों पर आज होने वाले मतदान में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समेत कई दिग्गजों का सियासी भविष्य तय होगा। प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के मुताबिक प्रधानमंत्री के उम्मीदवारी वाले क्षेत्र वाराणसी समेत राज्य की 13 लोकसभा सीटों पर मतदान रविवार सुबह सात बजे शुरू होकर शाम छह बजे तक चलेगा।

इस चरण में वाराणसी के अलावा गाजीपुर, मिर्जापुर, महराजगंज, गोरखपुर, कुशीनगर, देवरिया, बांसगांव, घोसी, सलेमपुर, बलिया, चंदौली और रॉबट्र्सगंज सीटों के लिये मतदान होगा। इस चरण में कुल 167 प्रत्याशी मैदान में हैं। सातवें चरण में प्रधानमंत्री मोदी के अलावा केन्द्रीय मंत्री मनोज सिन्हा (गाजीपुर), अनुप्रिया पटेल (मिर्जापुर), प्रदेश भाजपा अध्यक्ष महेन्द्र नाथ पाण्डेय (चंदौली), पूर्व केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री आर.पी.एन. सिंह (कुशीनगर) जैसी सियासी हस्तियों का भाग्य तय होगा।

सबकी निगाहें प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय निर्वाचन और उम्मीदवारी वाले क्षेत्र बनारस पर लगी हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा के पक्ष में चली लहर का केन्द्र बने मोदी ने करीब तीन लाख 72 हजार मतों से यह सीट जीती थी। इस बार भी उनकी जीत सुनिश्चित मान रही भाजपा के सामने मोदी को पिछली दफा के मुकाबले अधिक मतों से जिताने की चुनौती है।

वैसे तो भाजपा ने गोरखपुर सीट पर भोजपुरी अभिनेता रवि किशन को मैदान में उतारा है, मगर इसे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा जा रहा है। योगी यहां से पांच बार सांसद चुने जा चुके हैं। हालांकि पिछले साल इस सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा को सपा के हाथों पराजय का सामना करना पड़ा था। लिहाजा इस बार यह सीट जीतना भाजपा के लिये प्रतिष्ठा का सवाल है। केन्द्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल मिर्जापुर से दोबारा संसद पहुंचने की उम्मीद लगाये हैं। ऊंट किस करवट बैठेगा, यह 23 मई को पता चलेगा।

सातवें चरण में भाजपा 11 सीटों पर जबकि उसका सहयोगी अपना दल-सोनेलाल मिर्जापुर और रॉबट्र्सगंज सीटों पर चुनाव लड़ रहा है। पिछले लोकसभा चुनाव में सातवें चरण की सभी 13 सीटों पर भाजपा और उसके सहयोगी ने ही जीत दर्ज की थी। इस चरण का मतदान महागठबंधन कर चुनाव लड़ रहे सपा के आठ और बसपा के पांच प्रत्याशियों के भाग्य का भी फैसला करेगा। पिछले लोकसभा चुनाव में लगभग धराशायी हो चुके सपा और बसपा का इस दफा गठबंधन बन जाने से वह भाजपा के लिये एक चुनौती के तौर पर उभरता दिख रहा है।

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