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मृणाल सेन को फिल्मजगत में योगदान के लिए कई पीढ़ियों तक याद रखा जाएगा

चैनल हिंदुस्तान डेस्क: प्रसिद्ध फिल्म निर्माता व निर्देशक मृणाल सेन का रविवार सुबह कोलकाता के भवानीपुर स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। वे हृदय रोग के साथ उम्रजनित बीमारियों से पीडि़त थे। उनकी उम्र 95 साल थी। उनके पुत्र कुणाल सेन शिकागो(अमेरिका) में हैं, उनके भारत आने के बाद मंगलवार को मृणाल सेन की अंत्येष्टि की जाएगी।

‘नील आकाशेर नीचे’, ‘भुवन शोम’, ‘एक दिन अचानक’, ‘पदातिक’, ‘बाइशे श्रावण’ और ‘मृगया’ जैसी फिल्मों के लिए पहचाने जाने वाले सेन देश के सबसे प्रख्यात फिल्म निर्माताओं में से एक थे और समानांतर सिनेमा के दूत थे। मृणाल सेन का नाम भारतीय सिनेमा जगत में एक ऐसे फिल्मकार के तौर पर शुमार किया जाता है जिन्होंने अपनी फिल्मों के जरिये भारतीय सिनेमा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान दिलाई।

मृणाल सेन में एक खासियत ये थी कि वह फिल्मों के साथ एक्सपेरिमेंट करते रहते थे। इसके अलावा उनकी फिल्मों में समाज के यथार्थ की छवि साफ नजर आती थी। 14 मई, 1923 को फरीदाबाद (अब बांग्लादेश) में जन्मे मृणाल सेन ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा वहीं से हासिल की। इसके बाद उन्होंने कोलकाता के मशहूर स्कॉटिश चर्च कॉलेज से आगे की पढ़ाई पूरी की।

इस दौरान वह कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेने लगे। हालांकि वह कभी इस पार्टी के सदस्य नहीं रहे। कॉलेज से पढ़ाई पूरी करने के बाद मृणाल सेन की रुचि फिल्मों के प्रति हो गई और वह फिल्म निर्माण से जुड़ी पुस्तकों का अध्ययन करने लगे। उनकी अधिकतर फिल्में बांग्ला में हैं।

इन पुरस्कारों से नवाजा गया

2005 में भारत सरकार ने उनको ‘पद्म विभूषण’ और 2005 में ही ‘दादा साहब फाल्के’ पुरस्कार प्रदान किया था। मृणाल सेन को 2000 में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने अपने देश का प्रतिष्ठित सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ फ्रेंडशिप’ दिया था। यह सम्मान पाने वाले वह अकेले भारतीय फिल्ममेकर थे। मृणाल सेन को भुवन शोम (1969), कोरस (1974), मृगया (1976) और अकालेर संधाने (1980) फिल्म के लिए स्वर्ण कमल प्राप्त हो चुके हैं।

राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर की फिल्में बनाईं

मृणाल सेन ने 1955 में अपनी पहली फीचर फिल्म ‘रातभोर’ बनाई थी। इसके बाद ‘नील आकाशेर नीचे’ ने उनको स्थानीय पहचान दिलाई। उस समय का हर बड़ा अभिनेता उनके साथ काम करने का इच्छुक था। मृणाल सेन की तीसरी फिल्म ‘बाइशे श्रावण’ ने उनको अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित कर दिया।

मृणाल सेन ने भारत सरकार की छोटी सी सहायता राशि से ‘भुवन शोम’ बनाई, जिसने उनको बड़े फिल्मकारों की श्रेणी में लाकर खड़ा कर दिया और उनको राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्रदान की। ‘भुवन शोम’ ने भारतीय फिल्म जगत में क्रांति ला दी और कम बजट की समांतर सिनेमा नाम से एक नया युग शुरू हुआ।

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