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पाकिस्तान को सता रहा था भारत के मिसाइल हमले का डर!

चैनल हिंदुस्तान डेस्क: भारत ने यह साफ नहीं किया कि वह इस हमले का जवाब देने का विचार कर रहा है या नहीं। पाकिस्तान आखिरकार भारतीय एयरफोर्स पायलट विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान को छोड़ने के लिए तैयार हो गया है। भारतीय सीमा में घुसे पाकिस्तानी विमानों को खदेड़ने के दौरान दुर्भाग्यवश अभिनंदन का प्लेन पाक अधिकृत कश्मीर में क्रैश हो गया, जिसके बाद पाकिस्तानी सेना ने उन्हें बंदी बना लिया था। अभिनंदन को छोड़ने के लिए पाकिस्तान के राजी होने के पीछे बहुत सारी कूटनीतिक कोशिशों का असर है। पाकिस्तान ने अभिनंदन को कब्जे में करने के बाद दुनिया के अहम देशों के वार्ताकारों से संपर्क किया। इनमें पी 5 देशों के वार्ताकार भी शामिल थे। इन देशों के वार्ताकारों को बताया गया कि भारतीय तीन तरह से आक्रामक जवाब देने की तैयारी कर रहा है। पहली- नेवी के जंगी बेड़ों को कराची की ओर भेजना, बलिस्टिक मिसाइलों के लॉन्च की योजना और भारत और पाक सीमा पर सैन्य टुकड़ियों का जमावड़ा बढ़ाना।

इस सूचना से परेशान विदेशी सरकारों ने तुंरत भारत से बात की। माना जा रहा है कि भारत की ओर से इन खबरों को ‘काल्पनिक’ करार दिया गया। बताया गया कि भारतीय जंगी बेड़े तो कराची से दूर दिशा की ओर जा रहे हैं। भारत ने कहा कि इस देशों के पास आसमान से इन तरह के मूवमेंट को ‘भांपने’ की क्षमता है, इसलिए वे खुद पाकिस्तान के इन दावों का पता लगा सकते हैं। भारत ने यह साफ कर दिया कि वह टकराव बढ़ाने की दिशा में नहीं सोच रहा। उसने तो पाकिस्तान के अंदर ‘असैन्य आतंक निरोधी कार्रवाई’ को अंजाम दिया है। भारत ने कहा कि यह पाकिस्तान है जिसने उसके सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की कोशिश की।

अंतरराष्ट्रीय वार्ताकारों को बताया कि कम से कम 20 पाकिस्तानी एयरक्राफ्ट भारतीय सैन्य चौकियों की ओर बढ़े और लाइन ऑफ कंट्रोल का उल्लंघन किया। उन्होंने कुछ लेसर गाइडेड मिसाइलों को छोड़ा। पाकिस्तान के दावों के उलट इन मिसाइलों के हमले से हमारे सैन्य प्रतिष्ठान बाल बाल बच गए। भारत सरकार ने पाकिस्तान को यह संदेश दिया कि उसने इसे आक्रामक कार्रवाई के तौर पर लिया है। पाकिस्तानी पीएम इमरान खान और पाक सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफूर ने दावा किया था कि दो भारतीय फाइटर प्लेन मार गिराए गए और दो पायलट पकड़े गए, यह गलत है। इन दावों से पाकिस्तान की विश्वसनीयता पर असर पड़ा।

भारत ने विदेशी सरकारों को बताया कि या तो खान को शुरुआत में सेना ने असली नुकसान के बारे में नहीं बताया या वह झूठे दावे कर रहे थे। भारत ने यह साफ नहीं किया कि वह इस हमले का जवाब देने का विचार कर रहा है या नहीं। उस हमले का, जिसमें एक मिग एयरक्राफ्ट को मार गिराया। भारत ने यह जिम्मेदारी पाकिस्तान के पाले में डाल दी कि वह तनाव कम करना चाहता है कि नहीं।

सूत्रों के मुताबिक, भारत ने मैसेज दिया कि यह पाकिस्तान की जिम्मेदारी है कि वो जिनेवा समझौते के तहत पायलट से बर्ताव करे और उसकी वापसी सुनिश्चित करे। भारत ने यह भी साफ कर दिया कि पायलट को छोड़ने के बदले कोई डील नहीं होगी। भारत ने यह भी जता दिया कि अगर पायलट को नुकसान पहुंचा या उसे नहीं छोड़ा गया तो गंभीर नतीजे होंगे।

उधर, पाकिस्तान खुद को अलग-थलग महसूस कर रहा था। पी 5 में से कोई भी देश उसके साथ खड़ा नहीं हुआ। वहीं, उनमें से कई ने पाकिस्तान को आतंकवादियों के खिलाफ ऐक्शन लेने के लिए कहा। यहां तक कि यूएई ने भी पाकिस्तान को उस मांग के लिए झिड़की दी जिसमें कहा गया था कि ओआईसी की ओर से भारत को दिया न्योता वापस लिया जाए। अमेरिका, अन्य पी 5 देश, यूरोपीय यूनियन, सऊद अरब और यूएई ने पाक का साथ नहीं दिया। इसके बाद पाकिस्तान के पास कोई विकल्प नहीं बचा। उधर, शाम को भारत की तीनों सेवाओं के प्रमुख साथ आए और कहा कि वे पूरी तरह से तैयार हैं, लेकिन किसी अन्य हमले से पहले टकराव को नहीं बढ़ाएंगे। भारतीय सेना का यह रुख न केवल पाकिस्तान बल्कि इंटरनैशनल समुदाय को भी मैसेज देने के लिए था।

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