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पीयूष गोयल ने स्टेशन स्वच्छता पर सर्वेक्षण रिपोर्ट जारी की

डेस्क: रेल, कोयला, वित्त तथा कारपोरेट मामलों के मंत्री पीयूष गोयल ने स्टेशन स्वच्छता पर भारतीय गुणवत्ता परिषद द्वारा किए गए सर्वेक्षण रिपोर्ट जारी की है। इस अवसर पर रेल बोर्ड के सदस्य, भारतीय गुणवत्ता परिषद के अध्यक्ष तथा रेल बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

स्वच्छता का स्तर बढ़ाने के लिए स्टेशनों के गंदे स्थानों एवं स्वच्छता अंतरालों की पहचान करके रेलवे का यह तीसरा अंकेक्षण सह-सर्वेक्षण है ताकि स्वच्छता के मानकों में सुधार किया जा सके और विभिन्न रेलवे स्टेशनों के बीच स्वच्छता के मामले में स्पर्धा की भावना बढ़ाई जा सके।

रेल मंत्री ने बताया कि भारतीय रेल स्वच्छता, समयपालन और यात्रियों के लिए कैटरिंग सेवाओं को प्राथमिकता दे रही है। पिछले चार वर्षों में स्वच्छ रेल, स्वच्छ भारत अभियान से प्रतीक्षा क्षेत्र प्लेटफॉर्मों, ट्रेनों, शौचालयों तथा स्टेशनों पर पार्किंग की स्वच्छता में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है।

रेल मंत्री ने कहा कि स्टेशनों की स्वच्छता रैंकिंग बेहतर प्रदर्शन करने वाले स्टेशनों के लिए केवल पुरस्कार नहीं है, बल्कि उन स्टेशनों के लिए भी बढ़ावा है जो रैंकिंग में शीर्ष स्थान पर नहीं पहुंच पाए। उन्होंने कहा कि भारतीय गुणवत्ता द्वारा इस वर्ष की गई स्वच्छता रैंकिंग से यह जाहिर होता है कि ए-1 श्रेणी के स्टेशनों में शीर्ष पर राजस्थान में उत्तर-पश्चिम रेलवे के दो महत्वपूर्ण पर्यटक स्टेशन जोधपुर (प्रथम स्थान) तथा जयपुर (द्वितीय स्थान) हैं।

दक्षिण मध्य रेलवे में एक अन्य महत्वपूर्ण धार्मिक स्टेशन तिरुपति को रैंकिंग में तीसरा स्थान प्राप्त हुआ है। ए श्रेणी के स्टेशनों में मारवाड़ स्टेशन पहले स्थान पर और फुलेरा स्टेशन दूसरे स्थान पर है। दोनों स्टेशन राजस्थान में उत्तर-पश्चिम रेलवे में आते हैं। तीसरा स्थान तेलंगाना में दक्षिण-मध्य रेलवे के वारंगल स्टेशन को प्राप्त हुआ है।

रिपोर्ट की प्रमुख विशेषताएं:

सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार 2017 की तुलना में शीर्ष 10 स्टेशनों में 9 प्रतिशत सुधार हुआ है। अगले 10 स्टेशनों में 14 प्रतिशत, 201 से 300 स्टेशनों में 20 प्रतिशत तथा 301 से 407 स्टेशनों में 31 प्रतिशत सुधार हुआ है।
2017 की तुलना में स्वच्छता में 10 जोनों ने 10-20 प्रतिशत सुधार दिखाया है। 4 जोन में 20 प्रतिशत से अधिक सुधार हुआ है और 2 जोन का प्रदर्शन 10 प्रतिशत से कम रहा है।
समय-समय पर वार्षिक सर्वेक्षण कराने के लिए किए गए नीतिगत निर्णय के परिणामस्वरूप यह सर्वेक्षण गंदे स्थानों/स्वच्छता अंतरालों की पहचान करने, स्वच्छता मानकों में सुधार करने और रेलवे स्टेशनों के बीच स्वच्छता के लिए स्पर्धा भाव प्रोत्साहित करने के लिए किया गया। भारतीय गुणवत्ता परिषद द्वारा अपने सहयोगियों की सहायता से 2018 में भी सर्वेक्षण किया गया है। गुणवत्ता परिषद ने 160 मूल्यांकनकर्ताओं को प्रशिक्षित करके तैनात किया है, ताकि गुणवत्ता और निरंतरता सुनिश्चित हो सके। भारतीय गुणवत्ता परिषद ने प्रत्येक स्टेशन पर दो दिनों के लिए दो व्यक्तियों की तैनाती की है और तीन व्यक्तियों के केन्द्रीय दल की तैनाती 25 दिनों के लिए की गई। इस तरह कुल 1628 मानव दिवस का उपयोग किया गया।
2016 में आईआरसीटीसी द्वारा पहला सर्वेक्षण किया गया। इस सर्वेक्षण में स्वच्छता के विभिन्न मानकों पर विभिन्न स्टेशनों पर यात्रियों के साक्षात्कार लिए गए और इसके आधार पर स्टेशनों की स्वच्छता रेटिंग की गई। दूसरा सर्वेक्षण 2017 में भारतीय गुणवत्ता परिषद द्वारा किया गया।
सर्वेक्षण के लिए निम्नलिखित मानक अपनाए गएः पार्किंग, प्रमुख प्रवेश क्षेत्र, मुख्य प्लेटफॉर्म, प्रतीक्षालय की स्वच्छता प्रक्रिया का मूल्यांकन (33.33 प्रतिशत), गुणवत्ता परिषद के मूल्यांकनकर्ताओं द्वारा इन क्षेत्रों में प्रत्यक्ष निरीक्षण (33.33 प्रतिशत) तथा यात्री फीडबैंक (33.33 प्रतिशत)। सातों दिन 24 घंटे के लिए नियंत्रण कक्ष की स्थापना की गई और प्रगति की निगरानी के लिए चित्र जीओ टैग किए गए।

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