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शांति दूत बन कर PM मोदी स्वदेश लौटे, इनाम का 2 लाख डॉलर गंगा सफाई के लिए समर्पित कर दिए

चैनल हिंदुस्तान डेस्क: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सियोल शांति पुरस्कार ग्रहण करने के बाद शुक्रवार रात स्वदेश लौट आए हैं। शुक्रवार को ही दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल में पीएम मोदी को साल 2018 का ‘सियोल शांति पुरस्कार’ दिया गया था। वह यह सम्मान हासिल करने वाले पहले भारतीय और दुनिया की 14वीं शख्सियत हैं।

दिल्ली लौटते ही पालम एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री का जोरदार स्वागत किया गया। पीएम मोदी के स्वागत के लिए हजारों लोगों का हुजूम यहां पहले से ही मौजूद था, जिनमें बीजेपी के कार्यकर्ताओं से लेकर आम लोग भी शामिल थे।

सियोल से ‘शांति दूत’ बनकर लौटे प्रधानमंत्री मोदी ने भी अपने हजारों समर्थकों को निराश नहीं किया। कारों के लंबे चौड़े काफिले को रोका और सुरक्षा घेरा तोड़कर लोगों के करीब जाकर उनका अभिवादन स्वीकार किया।

प्रधानमंत्री ने वहां मौजूद हुजूम की पहली लाइन में खड़े तमाम लोगों से हाथ मिलाया। इस बीच लोगों ने मोदी-मोदी के नारे लगाने शुरू कर दिए। प्रधानमंत्री की एक झलक लेने और उनसे हाथ मिलाने की आस में सर्द रात और मौसम भी बाधा नहीं बन सका।

प्रशंसकों का उत्साह देखकर प्रधानमंत्री अभिभूत दिखे और उन्होंने बार-बार वहां जमा लोगों का अभिवाद भी किया।

प्रधानमंत्री मोदी अपने चिर परिचित अंदाज़ में सुरक्षा घेरा तोड़ते हुए करीब 5 मिनट तक लोगों के बीच रहे। इसके बाद वह अपने सुरक्षा काफिले के साथ एयरपोर्ट से रवाना हो गए।

शुक्रवार को दिन में सियोल पीस प्राइज फाउंडेशन की ओर से आयोजित एक भव्य समारोह में पीएम मोदी को यह शांति पुरस्कार प्रदान किया। इस मौके पर मोदी के जीवन और उनकी उपलब्धियों पर एक शॉर्ट फिल्म भी दिखाई गई। पीएम मोदी से पहले संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव कोफी अन्नान, जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल जैसी जानी मानी हस्तियां और संगठनों को यह पुरस्कार हासिल हो चुका है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत महात्मा गांधी की 150वीं जयंती मना रहा है ऐसे में उन्हें यह पुरस्कार दिया जाना उनके लिए सम्मान की बात है। उन्होंने पुरस्कार की दो लाख डॉलर की राशि गंगा सफाई अभियान से जुड़े नमामि गंगे प्रोजेक्ट को समर्पित की।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में पुलवामा आतंकी हमले पर शोक जताते हुए आतंकवाद को वैश्विक समस्या बताया और कहा कि यह वैश्विक शांति एवं सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं। पुलवामा हमले पर शोक व्यक्त करने और भारत के समर्थन के लिए उन्होंने राष्ट्रपति मून का धन्यवाद किया।

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