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राममंदिर पर बोले न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, अतीत पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं

चैनल हिंदुस्तान डेस्क: अयोध्या के राम मंदिर-बाबरी मस्जिद जमीन विवाद मामले को मध्यस्थता के लिए भेजा जाए या नहीं, इस पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है। सुप्रीम कोर्ट में हिन्दू महासभा मध्यस्थता के लिए तैयार नहीं है। उसने कहा है कि बिना सभी पक्षों की बात सुने मध्यस्थता का आदेश नहीं दिया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि हम हैरान हैं कि विकल्प आजमाए बिना मध्यस्थता को खारिज क्यों किया जा रहा है! कोर्ट ने कहा अतीत पर हमारा नियंत्रण नहीं है पर हम बेहतर भविष्य की कोशिश जरूर कर सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले को लेकर कहा कि जब वैवाहिक विवाद में कोर्ट मध्यस्थता के लिए कहता है तो किसी नतीजे की नहीं सोचता। बस विकल्प आज़माना चाहता है। हम ये नहीं सोच रहे कि कोई किसी चीज का त्याग करेगा, हम जानते हैं कि ये आस्था का मसला है। हम इसके असर के बारे में जानते हैं।

सुनवाई के दौरान जस्टिस बोबडे ने कहा कि हम मामले में प्रतिफल चाहते हैं। यह केवल जमीन से नहीं बल्कि लोगों की भावनाओं से जुड़ा मामला है। जब हिंदू पक्ष ने कहा कि मध्यस्थता का कोई अर्थ नहीं होगा क्योंकि हिंदू इसे एक भावुक और धार्मिक मुद्दा मानते हैं तो न्यायमूर्ति एस ए बोबडे ने कहा कि हमने भी इतिहास पढ़ा है और अतीत पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं है। हम जो कर सकते हैं वह केवल वर्तमान के बारे में है।

सुनवाई के दौरान जस्टिस एसए बोबडे ने कहा कि इसमें केवल एक मेडिएटर की जरूरत नहीं है बल्कि मेडिएटर्स का पूरा पैनल ही यहां जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यह ठीक नहीं होगा कि अभी कहा जाए कि इसका कोई नतीजा नहीं होगा। यह भावनाओं और विश्वास का टकराव है। यह दिल और दिमाग पाटने का सवाल है। हमें गंभीरता पता है। हमें पता है बाबरी का क्या हुआ। हम इस मामले को आगे देख रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसका मानना है कि अगर मध्यस्थता की प्रक्रिया चालू की जाती है तो इसके घटनाक्रमों पर मीडिया रिपोर्टिंग पूरी तरह से बैन होनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि यह कोई गैग ऑर्डर यानी न बोलने देने का आदेश नहीं है बल्कि सुझाव है कि रिपोर्टिंग नहीं होनी चाहिए। मामले की सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्षकार ने कहा मेडिएशन के लिए सबकी सहमति जरूरी नहीं है।

वहीं इसपर जज चंद्रचूड़ ने कहा कि यह विवाद दो समुदाय का है और सबको इसके लिए तैयार करना आसान काम नहीं है। यह बेहतर होगा कि दोनों समुदायों के आपसी बातचीत से मामला हल हो जाए पर कैसे ये अहम सवाल बना हुआ है।

निर्मोही अखाड़े ने मध्यस्थता के पक्ष में दलील दी है। इसके साथ सुन्नी वक्फ बोर्ड ने भी मध्यस्थता का पक्ष लिया जबकि हिंदू महासभा इसके विरोध में है। मुस्लिम पक्षकारों के वकील ने कहा कि मुस्लिम पक्ष मध्यस्थता के लिए सहमत है और किसी भी तरह का सुलह या समझौता पार्टियों को बांध देगा।

सुप्रीम कोर्ट में आज अयोध्या मामले में हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षकार अपना पक्ष रख रहे हैं और वे कोर्ट को बताएंगे कि क्या वे मध्यस्थता के लिए तैयार हैं या नहीं और फिर कोर्ट मामले में आदेश पारित करेगी। यहां चर्चा कर दें कि सुप्रीम कोर्ट कह चुकी है कि दोनों पक्ष इस मामले में अदालत को अपने मत से अवगत कराने का काम करें।

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